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Bilaspur Express न्यूज़, बिलासपुर, 27 मार्च 2025 – आईपीएल 2025 के शुरू होते ही बिलासपुर में सट्टेबाजी का नेटवर्क फिर से सक्रिय हो गया है। हर गली-मोहल्ले में सटोरियों के गुर्गे खुलेआम घूम रहे हैं और क्रिकेट मैचों पर जमकर सट्टा लगवा रहे हैं। हालांकि, पुलिस और एसीसीयू (एंटी क्राइम एंड साइबर यूनिट) की टीमें इस पर कोई कड़ा रुख अपनाती नहीं दिख रही हैं, जिससे सटोरियों के हौसले बुलंद हैं।
शहर में कई इलाकों में सक्रिय हैं सटोरिए
सूत्रों के मुताबिक, तोरवा पुरानी बस्ती, देवरीखुर्द, विनोबा नगर, राजकिशोर नगर और सिंधी कॉलोनी जैसे इलाकों में कुख्यात सटोरिए सक्रिय हैं। हालांकि, पुलिस कार्रवाई से बचने के लिए ये खुद सामने नहीं आ रहे, बल्कि अपने गुर्गों के जरिए ऑनलाइन और मोबाइल नेटवर्क के माध्यम से सट्टे का संचालन कर रहे हैं। बताया जा रहा है कि हर दिन लाखों रुपये का सट्टा खेला जा रहा है, और इसमें कई स्थानीय युवा भी फंसते जा रहे हैं।
पुलिस और एसीसीयू की भूमिका पर सवाल
आमतौर पर आईपीएल के दौरान पुलिस विशेष अभियान चलाती थी, लेकिन इस बार कार्रवाई नगण्य दिख रही है। आरोप है कि कुछ पुलिसकर्मियों और साइबर सेल के अधिकारियों की मिलीभगत के चलते सट्टेबाजों को खुली छूट मिली हुई है। लोकल थानों तक ऑनलाइन सट्टेबाजों की सही जानकारी नहीं पहुंच पा रही, जिससे कार्रवाई में देरी हो रही है।
क्या पुलिस को बड़े शहरों में सक्रिय सट्टेबाजों की जानकारी नहीं है?
सूत्रों के अनुसार, सट्टेबाजों के नेटवर्क का विस्तार अब गोवा, मुंबई, कोलकाता और इंदौर जैसे बड़े शहरों में भी हो चुका है। क्या पुलिस को इन शहरों में सट्टेबाजों की गतिविधियों के बारे में जानकारी नहीं है, या फिर इसे नजरअंदाज किया जा रहा है?
केवल दिखावटी कार्रवाई, असली सरगना आज भी आज़ाद
शहर के विभिन्न हिस्सों में सटोरियों के गुर्गे खुलेआम सट्टा चला रहे हैं, लेकिन पुलिस अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठा पाई है। जब भी कार्रवाई होती है, तो केवल छोटे गुर्गों को पकड़कर खानापूर्ति कर दी जाती है, जबकि असली मास्टरमाइंड पर्दे के पीछे से अपना नेटवर्क चला रहे हैं। अगर जल्द ही पुलिस ने प्रभावी कार्रवाई नहीं की, तो शहर में यह गैरकानूनी कारोबार और ज्यादा फैल सकता है।
प्रशासन से सख्त कार्रवाई की मांग
शहर के जागरूक नागरिकों और सामाजिक संगठनों ने प्रशासन और पुलिस से मांग की है कि आईपीएल के दौरान सट्टेबाजी पर रोक लगाने के लिए सख्त कदम उठाए जाएं। डिजिटल और साइबर मॉनिटरिंग बढ़ाई जाए ताकि ऑनलाइन सट्टेबाजी पर भी शिकंजा कसा जा सके। यदि प्रशासन जल्द ही हरकत में नहीं आता, तो यह समस्या और गंभीर हो सकती है।